संजय साेलंकी का ब्लाग

सुबह की कविता

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सुबह मस्जिद की अज़ान,
मंदिर में घंटियों की आवाज़े..
नन्हे पंछियों का कलरव,
और उनकी बुलंद परवाज़ें..
जब बादलो की कैद से आज़ाद हुआ सूरज,
चाँद ने अंदर जाकर बंद कर लिये दरवाजें..

© संजय
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सफ़ल गृहस्थ जीवन का राज : Sant Kabir Das






संत कबीर रोज सत्संग किया करते थे। दूर-दूर से लोग उनकी बात सुनने आते थे। एक दिन सत्संग खत्म होने पर भी एक आदमी वहीं बैठा रहा।

कबीर ने इसका कारण पूछा तो वह बोला, मुझे आपसे कुछ पूछना है।

वह आगे बोला.. मैं गृहस्थ हूं, घर में सभी लोगों से मेरा झगड़ा होता रहता है । मैं जानना चाहता हूं कि मेरे यहां गृह-क्लेश क्यों होता है और वह कैसे दूर हो सकता है?

कबीर थोड़ी देर चुप रहे, फिर उन्होंने अपनी पत्नी से कहा, लालटेन जलाकर लाओ।

कबीर की पत्नी लालटेन जलाकर ले आई। वह आदमी भौचक्का होकर यह देखता रहा। सोचने लगा इतनी दोपहर में कबीर ने लालटेन क्यों मंगाई।

थोड़ी देर बाद कबीर बोले, कुछ मीठा दे जाना। इस बार उनकी पत्नी मीठे के बजाय नमकीन देकर चली गई।

उस आदमी ने सोचा कि यह तो शायद पागलों का घर है। मीठा के बदले नमकीन.. दिन में लालटेन। वह बोला, कबीर जी मैं चलता हूं।

कबीर ने पूछा, आपको अपनी समस्या का समाधान मिला या अभी कुछ संशय बाकी है?

वह व्यक्ति बोला, मुझे कुछ भी समझ में नहीं आया।

तब कबीर ने कहा, जैसे मैंने लालटेन मंगवाई तो मेरी पत्नी कह सकती थी कि तुम क्या सठिया गए हो। इतनी दोपहर में लालटेन की क्या जरूरत। लेकिन नहीं, उसने सोचा कि जरूर किसी काम के लिए ही लालटेन मंगवाई होगी।

मीठा मंगवाया तो नमकीन देकर चली गई। हो सकता है घर में कोई मीठी वस्तु न हो। यह सोचकर मैं चुप रहा। इसमें लड़ाई क्या करना? आपसी विश्वास बढ़ाने और तकरार में न फंसने से विषम परिस्थिति अपने आप दूर हो जाती हैं।
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झील और ग्लास : Zen Story in Hindi






एक बार एक युवक किसी ज़ेन गुरु के पास जाकर बोला: "गुरुदेव, मैं अपनी ज़िन्दगी से बहुत परेशान हूँ, कृपया इस परेशानी से निकलने का उपाय बताएं!"

गुरु बोले: "पानी के ग्लास में एक मुट्ठी नमक डालो और उसे पीयो।"

युवक ने ऐसा ही किया..!

फिर गुरु ने युवक से पूछा: "इसका स्वाद कैसा लगा?"

युवक थूकते हुए बोला: "बहुत ही खराब… एकदम खारा!"

फिर गुरु मुस्कुराते हुए बोले: "एक बार फिर अपने हाथ में एक मुट्ठी नमक ले लो और मेरे साथ आओ।"

दोनों धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगे और थोड़ी दूर जाकर स्वच्छ पानी से बनी एक झील के सामने जाकर रुक गए।

गुरु ने पुनः कहा: अब इस नमक को पानी में दाल दो।"

युवक ने ऐसा ही किया...

गुरु बोले: अब इस झील का पानी पियो।

युवक पानी पीने लगा......

एक बार फिर गुरु ने पूछा: "बताओ इसका स्वाद कैसा है? क्या अभी भी तुम्हे ये खरा लग रहा है?!"

"नहीं, ये तो मीठा है, बहुत अच्छा है", युवक बोला।

अब गुरु युवक के बगल में आकर बैठ गए और उसका हाथ थामते हुए बोले, "जीवन के दुःख बिल्कुल नमक की तरह हैं; न इससे कम ना ज्यादा। जीवन में दुःख की मात्र वही रहती है, बिल्कुल वही। लेकिन हम कितने दुःख का स्वाद लेते हैं ये इस बात पर निर्भर करता है कि हम उसे किस पात्र में डाल रहे हैं।

इसलिए जब तुम दुखी हो तो सिर्फ इतना कर सकते हो.. कि खुद को बड़ा कर लो... ग़्लास मत बने रहो!!
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प्रेरक विचार : Motivational quotes in Hindi






विश्वप्रसिद्ध विचारकों के कुछ प्रमुख प्रेरक विचार:

~ लोग अक्सर कहते हैं कि प्रेरक विचारों से कुछ नहीं होता। हाँ भाई, वैसे तो नहाने से भी कुछ नहीं होता, तभी तो हम इसे रोज़ करने की सलाह देते हैं।
– ज़िग ज़िगलर

साहस भय की अनुपस्थिति नहीं है। यह तो इस निर्णय तक पहुँचने का बोध है कि कुछ है जो भय से भी ज्यादा महत्वपूर्ण है।
- एम्ब्रोस रेडमून

~ जिस आदमी के पास सिर्फ हथौड़ा होता है उसे अपने सामने आने वाली हर चीज़ कील ही दिखती है।
- अब्राहम मासलो

~ तीसरे दर्जे का दिमाग बहुमत के जैसी सोच रखने पर खुश होता है। दूसरे दर्जे का दिमाग अल्पमत के जैसी सोच रखने पर खुश होता है. और पहले दर्जे का दिमाग सिर्फ सोचने पर ही खुश हो जाता है।
- ए ए मिलन

~ अपने विचारों पर ध्यान दो, वे शब्द बन जाते हैं। अपने शब्दों पर ध्यान दो, वे क्रिया बन जाते हैं। अपनी क्रियाओं पर ध्यान दो, वे आदत बन जाती हैं। अपनी आदतों पर ध्यान दो, वे तुम्हारा चरित्र बनाती हैं। अपने चरित्र पर ध्यान दो, वह तुम्हारी नियति का निर्माण करता है।
- लाओ-त्जु

~ हम क्या सोचते हैं, क्या जानते हैं, और किसमें विश्वास करते हैं – अंततः ये बातें मायने नहीं रखतीं। हम क्या करते हैं वही महत्वपूर्ण है।
- जॉन रस्किन

~ सही राह पर होने के बाद भी यदि आप वहां बैठे ही रहेंगे तो कोई गाड़ी आपको कुचलकर चली जायेगी।
– विल रोजर्स

~ अपने शत्रुओं को सदैव क्षमा कर दो। वे इससे ज्यादा किसी और बात से नहीं चिढ़ते।
– ऑस्कर वाइल्ड

~ मेरा निराशावाद इतना सघन है कि मुझे निराशावादियों की मंशा पर भी संदेह होता है।

~ कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो इसलिए आत्महत्या नहीं करते क्योंकि उन्हें लगता है कि लोग क्या कहेंगे।

~ हम सभी रोज़ कुछ-न-कुछ सीखते हैं। और ज्यादातर हम यही सीखते हैं कि पिछले दिन हमने जो सीखा था वह गलत था।
– बिल वौगेन

~ लंबा पत्र लिखने के लिए माफी चाहता हूँ पर इसे छोटा करने के लिए मेरे पास समय नहीं था। – ब्लेज़ पास्कल

~ किसी सूअर से कुश्ती मत करो। तुम दोनों गंदगी में लोटोगे पर इसमें मज़ा सिर्फ सूअर को ही आएगा। – केल यार्बोरो

~ चूहादौड़ में अगर आप जीत भी जायेंगे तो भी चूहा ही तो कहलायेंगे! – लिली टॉमलिन

जब मुझे भूख लगती है तो खा लेता हूँ और जब थक जाता हूँ तो लेट जाता हूँ। मूर्ख मुझ पर हंस सकते हैं लेकिन ज्ञानीजन मेरी बातों का अर्थ समझते हैं।
- लिन-ची

~ विवाह करने से पहले मेरे पास बच्चों को पालने के छः सिद्धांत थे। अब मेरे पास छः बच्चे हैं पर सिद्धांत एक भी नहीं।
– जॉन विल्मोट

और अंत में सबसे मजेदार प्रेरक विचार...

~ मैं सैकड़ों ज्योतिषियों और तांत्रिकों के यहाँ गया और उन्होंने मुझे हजारों बातें बताईं। लेकिन उनमें से एक भी मुझे यह नहीं बता सका कि मैं एक पुलिसवाला हूँ जो उन्हें गिरफ्तार करने आया है।
– न्यूयॉर्क पुलिसमैन
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जलन : A story about jealousy






एक समय की बात है। किसी राज्य में चार ब्राम्हण रहते थे। एक दिन उन चारों ने तपस्या करके भगवान को खुश करने और भगवान के आशीर्वाद से अपनी मनो-कामना पूरी करने का विचार किया।

ऐसा विचार करके चारो ब्राम्हण जंगल की तरफ चले गए और तपस्या करने लगे। मौसम बीतें लेकिन उनकी तपस्या अनवरत जारी रही।

अंततः उनकी कठिन तपस्या से भगवान प्रसन्न हो गए और उनके सामने प्रकट हो गए और कहने लगे मैं तुम चारो की तपस्या से खुश हूँ। मांगों, क्या वर मांगते हो!

पहले ब्राम्हण ने कहा भगवान मुझे इस संसार का सबसे आमिर आदमी बना दो। भगवान ने कहा.. तथास्तु! और वह संसार का सबसे अमीर आदमी बन गया।

फिर भगवान ने दूसरे ब्राम्हण से कहा: मैं तुमसे भी खुश हूँ, तुम भी वर मांगों।

दूसरे ब्राम्हण ने कहा मुझे संसार का सबसे सुन्दर इंसान बना दो। भगवान ने फिर कहा.. तथास्तु! और वह संसार में सर्वाधिक सुंदर इंसान बन गया।

फिर भगवान ने तीसरे ब्राम्हण से कहा: मांगो, तुम क्या मांगते हो वत्स!

तीसरे ब्राम्हण ने कहा मुझे दुनिया का सबसे होशियार इंसान बना दो! भगवान नें कहा, तथास्तु!

फिर भगवान ने चौथे ब्राम्हण से कहा, मांगों.. तुम क्या मांगते हो वत्स!?

चौथे ब्राम्हण ने कहा: भगवान मुझे तो बस इतना वर दीजिए की ये तीनो जैसे थे वैसे ही हो जाए।

... अगर किन्ही दो बराबर लकीरों में से पहली को बड़ी बनाना है तो दूसरी लकीर को मिटाकर छोटी करने की बजाये पहली को ही और आगे बड़ा देना चाहिए।

ठीक उसी प्रकार इंसान को भी दूसरे को छोटा करने से बेहतर खुद को बड़ा या बेहतर बनाना चाहिए। क्योंकि दूसरे की प्रगति रोकने के चक्कर में वो खुद की प्रगति भी कम कर सकते है।

... जैसे अगर चौथा ब्राम्हण अपने लिए भी कुछ अच्छा मांग लेता तो भगवान उसे भी दे देते पर उसने जलकर अपने ही तीनो दोस्तों का नुकसान तो किया तो साथ में खुद का भी नुकसान कर लिया!
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स्वयंवर






कहीं किसी नदी के किनारे एक मुनियों का आश्रम था। वहाँ एक मुनिवर रहते थे।

एक दिन जब मुनि नदी के किनारे जल लेकर आचमन कर रहे थे कि अचानक उनकी पानी से भरी हथेली में ऊपर से एक चुहिया आकर गिर गई।

उस चुहिया को आकाश में एक बाज लिये जा रहा था। उसके पंजे से छूटकर वह नीचे गिर गई थी।

मुनि ने उसे पीपल के पत्ते पर रखा और फिर से गंगाजल में स्नान किया। चुहिया में अभी प्राण शेष थे। उसे मुनि ने अपने प्रताप से एक सुंदर कन्या का रुप दे दिया, और अपने आश्रम में ले आये।

मुनि नें अपनी पत्‍नी को कन्या अर्पित करते हुए कहा कि इसे अपनी ही लड़की की तरह पालना।

मुनि की अपनी कोई सन्तान नहीं थी, इसलिये मुनिपत्‍नी ने उसका लालन-पालन बड़े प्रेम से किया। युवावस्था तक वह उनके आश्रम में ही पलती रही।

जब कन्या की विवाह योग्य अवस्था हो गई तो मुनिपत्‍नी ने मुनि से कहा - "हे स्वामी! हमारी कन्या अब विवाह योग्य हो गई है। अतः इसके विवाह का प्रबन्ध कीजिये।"

मुनि ने कहा - "मैं अभी सूर्य को बुलाकर इसे उसके हाथ सौंप देता हूँ। यदि इसे स्वीकार होगा तो उसके साथ विवाह कर लेगी, अन्यथा नहीं।

मुनि ने पूछा: "हे पुत्री! यह त्रिलोक को प्रकाश देने वाला सूर्य, तुम्हें पतिरूप में स्वीकार है?"

पुत्री ने उत्तर दिया - "पिताश्री! यह तो आग जैसा गरम है, मुझे स्वीकार नहीं.. इससे अच्छा कोई वर बुलाइये।"

मुनि ने सूर्य से पूछा कि वह उससे श्रेष्ठ कोई वर बतलाये।

सूर्य ने कहा - "मुझ से अच्छे तो मेघ हैं, जो मुझे ढँककर छिपा लेते हैं।"

मुनि ने मेघ को बुलाकर अपनी पुत्री से पूछा - "क्या यह तुझे पतिरूप में स्वीकार है?"

कन्या ने कहा - "यह तो बहुत काला है.. अतः इससे भी अच्छे किसी वर को बुलाओ।"

मुनि ने मेघ से भी पूछा कि उससे अच्छा कौन है.. मेघ ने कहा, "मुझ से अच्छे तो वायुदेव हैं, जो मुझे उड़ाकर विभिन्न दिशाओं में ले जाते है।"

मुनि ने वायुदेव को बुलाया और पुनः कन्या से स्वीकृति पूछी।

कन्या ने कहा - "पिताश्री! यह तो बड़े ही चंचल है। इनसे भी किसी अच्छे वर को बुलाओ।"

मुनि ने वायुदेव से भी पूछा कि उनसे श्रेष्ठ कौन है.. वायुदेव ने कहा, "मुझ से श्रेष्ठ पर्वत है, जो बड़ी से बड़ी आँधी में भी स्थिर रहता है।"

मुनि ने पर्वत को बुलाया और पुनः अपनी कन्या से पूछा तो उस ने कहा - "पिताश्री! यह तो बड़ा कठोर और गंभीर है, इससे अधिक अच्छा कोई वर बुलाओ।"

मुनि ने पर्वत से कहा कि वह अपने से श्रेष्ठ कोई वर सुझाये। तब पर्वत ने कहा - "मुझ से अच्छा चूहा है, जो मुझे तोड़कर अपना बिल बना लेता है।"

मुनि ने तब चूहे को बुलाया और पुनः कन्या से कहा - "पुत्री! यह चूहा तुझे स्वीकार हो तो इससे विवाह कर ले।"

मुनिकन्या ने चूहें को बड़े ध्यान से देखा। उसके साथ उसे विलक्षण अपनापन अनुभव हो रहा था।

प्रथम दृष्टि में ही वह उस पर मुग्ध हो गई और बोली - "हे पिताश्री! मुझे यह स्वीकार है। आप मुझे चुहिया बनाकर इन चूहे जी के हाथों सौंप दीजिये।"

मुनि ने अपने तपोबल से उसे फिर चुहिया बना दिया और चूहे के साथ उसका विवाह कर दिया।
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सफल लोगों की 10 सफल आदतें : 10 Habits of successful people






हर इंसान सफल होना चाहता हैं। लेकिन सवाल यह है कि सफल हुआ कैसे जाए? क्योंकि दिन मेें तो सिर्फ 24 घंटे ही होते हैं, तो क्या अतिरिक्त प्रयास किये जायें? लेकिन यदि इन्हीं 24 घण्टों को सही से और ज्यादा प्रभावशाली तरीके से जिया जाए तो एक ही जीवन में कई जीवन जीना संभव हो सकता है।

1. शुक्रगुजार: सफल लोग ईश्वर का हर दिन आभार व्यक्त करते हैं। इसके अतिरिक्त वो दिन में एक बार किसी ना किसी का शुक्रिया जरूर अदा करते हैं।

2. सीखने की ललक: वो लगातार सीखने में विश्वास करते हैं और स्वयं में सुधार लाते रहते हैं। वो गलतियों से घबराने की बजाय उनसे सीख कर आगे बढ़ने में यकीन करते हैं।

3. रोलमॉडल: वो हमेशा किसी ना किसी को अपना रोलमॉडल बनाकर उसकी तरह बनने का प्रयास करते हैं। जिससे उनके सामने एक लक्ष्य बना रहें।

4. माहौल: सफल लोग अपने आस-पास सकारात्मक, बड़ी सोच वाले, उदार मन वाले और सकारात्मक गुडविल वाले लोगों से घिरे रहते हैं। उनके आस-पास किसी भी फालतू बातें करने वालो के लिए कोई जगह नहीं होती।

5. पढ़ना: सफल लोग हर दिन पढ़ते है। अपनी जानकारी बढ़ाने और ज्ञानवर्धन के लिए वे हर दिन आधा घंटे अखबार, प्रेरणादायी किताबें या इंटरनेट पर सर्फ करके पढ़ते जरूर हैं।

6. टेक्नोलॉजी: सफल लोग टेक्नालाॅजी को अपना गुलाम बनाते हैं, खुद उसके गुलाम नहीं बनते। वो अपनी इच्छा से इंस्टाग्राम, फेसबुक, टिवटर आदि का उपयोग करते हैं.. हर वक्त नहीं।

7. व्यायाम: सफल लोग नियमित रूप से घूमने जाते है.. व्यायाम करते हैं और 7-8 घंटो की अच्छी नींद लेते हैं। सेहत की कीमत पर सफलता का चुनाव सफल लोग नहीं करते।

8. खुला दिमाग: सफल लोग खुले दिमाग वाले होते हैं। और अच्छे विचारों को अपनाते हैं लेकिन किसी भी बुरे विचार को अपने अंदर नहीं आने देते, अगर आता भी है तो तुरंत नकार कर देते हैं।

9. खुश रहना: सफल लोग हमेशा खुश रहतें है और लगातार यह कोशिश करते है कि उनके आसपास के लोग भी हमेशा खुश रहें.. मुस्कुरातें रहें।

10. उम्मीद: सफल लोग हमेशा अच्छे की उम्मीद रखते है। वे मानते है कि जो भी हो रहा है, अच्छे के लिए ही हो रहा है।
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एक सीधा-सादा इंसान! घोर पारिवारिक! घुमक्कड़! चाय प्रेमी! सिनेमाई नशेड़ी! माइक्रो-फिक्शन लेखक!

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